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हरियाणा राज्यसभा चुनाव: भारतीय जनता पार्टी के सामने दोनों सीट बचाने की चुनौती, कांग्रेस जुटी विधायकों को एकजुट रखने में

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चंडीगढ़: हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान होते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 16 मार्च को होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी के सामने दोनों सीटें बचाए रखने की बड़ी चुनौती है, जबकि कांग्रेस के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना और संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकना सबसे अहम परीक्षा मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव महज दो सीटों का नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का भी संकेत देगा।
इन दोनों सीटों पर वर्तमान सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। दोनों सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा गणित के हिसाब से इस बार तस्वीर बदलती दिख रही है। आंकड़ों के अनुसार एक सीट भाजपा और दूसरी कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है। इसके बावजूद भाजपा दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक बढ़त बनाए रखने की रणनीति बना रही है।
दावेदारों के नामों पर तेज हुई सरगर्मी
चुनाव की घोषणा के साथ ही दोनों दलों में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा खेमे में पूर्व विधायक और प्रभावशाली जाट नेता कुलदीप बिश्नोई, पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु तथा वर्तमान सांसद किरण चौधरी के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा एक सीट पर संगठन से जुड़े कार्यकर्ता को मौका दे सकती है, जबकि दूसरी सीट पर मजबूत और राष्ट्रीय स्तर की पहचान रखने वाले उम्मीदवार को उतारने की तैयारी है। इसमें मीडिया समूह के प्रमुख और राज्यसभा सांसद रह चुके सुभाष चंद्रा तथा पिछली बार निर्दलीय के रूप में जीत हासिल करने वाले कार्तिकेय शर्मा जैसे नामों की चर्चा जोरों पर है।
वहीं कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी सूची सामने आई है। पार्टी के केंद्रीय प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के नामों पर विचार चल रहा है। पार्टी नेतृत्व इस बार ऐसी रणनीति बनाने में जुटा है जिससे पिछले चुनावों जैसी स्थिति दोबारा न बने।
जीत का गणित: संख्या और रणनीति दोनों अहम
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं और हर विधायक के वोट का मूल्य 100 होता है। तय फार्मूले के अनुसार किसी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन चाहिए। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त आंकड़ा मौजूद है, जबकि भाजपा को दूसरी सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
यदि भाजपा दो उम्मीदवार उतारती है तो पहली सीट आसानी से जीत सकती है, लेकिन दूसरी सीट के लिए उसे निर्दलीय और इनेलो विधायकों के समर्थन के बावजूद अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह चुनाव पूरी तरह रणनीति, गठजोड़ और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर रहेगा।
क्रॉस वोटिंग का रहा है लंबा इतिहास
हरियाणा के राज्यसभा चुनाव हमेशा से राजनीतिक समीकरणों और नाटकीय घटनाक्रमों के लिए जाने जाते रहे हैं। 2016 में हुए चुनाव में स्याही कांड के चलते कांग्रेस उम्मीदवार हार गए थे और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे सुभाष चंद्रा को जीत मिली थी। वहीं 2022 में भी क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हार का सामना करना पड़ा था और निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा विजयी रहे थे।
इसी इतिहास को देखते हुए कांग्रेस इस बार अपने विधायकों को एकजुट रखने पर विशेष ध्यान दे रही है, जबकि भाजपा रणनीतिक तरीके से दूसरी सीट जीतने के लिए पूरा जोर लगाने की तैयारी में है।
चुनाव कार्यक्रम तय
राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना 26 फरवरी को जारी होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च, जांच 6 मार्च और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 मार्च तय की गई है। मतदान और मतगणना दोनों 16 मार्च को ही होंगे।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल दो सीटों तक सीमित नहीं है बल्कि इससे हरियाणा की आगामी राजनीति की दिशा तय होगी। भाजपा जहां दोनों सीटें जीतकर अपनी मजबूती दिखाना चाहती है, वहीं कांग्रेस इस चुनाव को संगठनात्मक एकता और राजनीतिक वापसी का मौका मान रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में दावेदारों के नामों और रणनीतियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने की पूरी संभावना है।

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